नवरात्रि में पूजन के समय क्यों बनाते है हल्दी-कुमकुम के पैर? Navratri ki puja me haldi aur kumkum se pairon ke nishan kyo banaate hai?

नवरात्रि में पूजन के समय क्यों बनाते है हल्दी-कुमकुम के पैर? Navratri ki puja me haldi aur kumkum se pairon ke nishan kyo banaate hai? माता के पैरों के निशान का पूजा में क्या महत्त्व है? आइये जानते है कि नवरात्री में पैरों के निशान क्यों बनाए जाते है?

देवी पूजा के दौरान अनेक बातों का ध्यान रखा जाता है उन्हीं में से एक परंपरा है पूजन स्थल पर हल्दी व कुमकुम से देवी मां के चरणों की आकृति बनाने की। देवी के चरणों की आकृति पूजन स्थल पर क्यों बनाते हैं ये बहुत कम लोग जानते हैं।

 

देवी मां के चरणों के यह प्रतीक अत्यंत शुभफलदायी माने जाते हैं। मान्यता है कि मां के चरणों में आध्यात्मिक ऊर्जा होती है जो हमारे मस्तिष्क को प्रखर बनाती है।

चरण गतिशीलता का प्रतीक माने जाते हैं जिसका अर्थ है जीवन निरंतर आगे बढ़ता है हमें भी अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए सांसारिक बंधनों को पीछे छोड़ते हुए प्रभु के श्रीचरणों में जाकर मोक्ष की प्राप्ति करनी है। हल्दी व कुमकुम का उपयोग इसलिए किया जाता है कि हिंदू धर्म में इन दोनों को अत्यंत शुभ माना जाता है।

पूजा स्थल के अलावा आप घर के मुख्य द्वार के चौखट पर भी माता के चरणों की आकृति बना सकते हैं ताकि मां का आशीर्वाद आपके कुटुंब पर हमेशा बना रहे। ध्यान रहे कि चरणों को आमने-सामने अंकित करने के बजाए, दायां चरण आगे व बायां चरण इससे थोड़ा पीछे की ओर बनाएं।

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