साथ रहणियां संग के साथी दया मेरे पै फेर दियो Sath rahniya sang ke sathi dya fer diyo

प्रिय दोस्त, फौजी दिन रात हमारी रक्षा करते है, वे गर्मी - सर्दी में बोर्डर पर खड़े पहरा देते रहते है, अपने परिवार से कोसों दूर रहते है, गोलियों से इनका सीना छन जाता है, ये भी किसी के बेटे है, किसी बहन के भाई है, किसी बेटा - बेटी के पिता है और किसी औरत के पति है। एक बार एक फौजी अपने अंत समय में क्या कहता है, इस रागनी में पढ़िए.....

साथ रहणियां संग के साथी दया मेरे पै फेर दियो
देश के उपर ज्यान झोंक दी लिख चिठी मैं गेर दियो।टेक

सब तै पहलम मेरे मात पिता नै चरणां मैं प्रणाम लिखो
चाचा ताऊ बड़े बड़ों नै मेरी दुआ सलाम लिखो
साथ रहणियां संग के साथी सब को राम राम लिखो
मां के जाए भाईयां नै मेरा ऐक जरूरी काम लिखो
जिस रस्ते मेरी अर्थी जा उस रस्ते फूल बिखेर दियो।

मेरी लाजवन्ती कै धोरै लिख द्यो नहीं फिकर में गात करै
कोण किसै की गैल्यां आया कोण किसै का साथ करै
एक दिन सब नै जाणा होगा कदे चिन्ता दिन रात करै
या तै ईज्जत म्हारी रै करें मामुली सी बात करै
जिस की गैल्यां खाई खेली वा छोड़ सज्जन की मेर दियो।

अपणे दिल मैं, जिन्दा सोचै कदे खान दान मैं टुक होज्या
छोटी छोटी दो मूरत सैं कदे बालक पण मैं दुःख होज्या
पाल पोस कै बड़े करै तै जिन्दगी भर का सुख होज्या
जवान अवस्था बाप की तरियां देश धर्म मैं रूख होज्या
जै बाप का बदला लेणा हो तै उचे सुर मैं टेर दियो।

हाथ जोड़ कै कैहर्या सूं मेरा इतणा कहण पुगाईयो
जाट के घर मैं जन्म लिया मत उल्टा कदम हटाईयो
जिस जननी का दूध पिया मत रण मैं आण लजाईयो
भारत मां की सेवा कर कै देश की ज्यान बचाईयो
कैह जाट मेहर सिंह रण मैं जा कै कर दुश्मन का ढेर दियो।

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