मोहन से दिल क्यूँ लगाया है मैं जानू या वो जाने Mohan se dil kyu lagaya hai main janu ya vo jane

यदि आप "मोहन से दिल क्यूँ लगाया है" नामक भजन की खोज कर रहें हो तो आप बिलकुल सही जगह पर आए हो. आप इस पोस्ट से अपनी पसंद का यह भजन पढ़ सकते हो और इसे अपने दोस्तों में बिलकुल मुफ्त में शेयर भी कर सकते हो. आइये इस भजन को पढियें, इन्तेजार किस बात का है.

मोहन से दिल क्यूँ लगाया है, यह मैं जानू या वो जाने ।
छलिया से दिल क्यूँ लगाया है, यह मैं जानू या वो जाने ॥

हर बात निराली है उसकी, कर बात में है इक टेडापन  ।
टेड़े पर दिल क्यूँ आया है, यह मैं जानू या वो जाने ॥

जितना दिल ने तुझे याद किया, उतना जग ने बदनाम किया ।
बदनामी का फल क्या पाया हैं, यह मैं जानू या वो जाने ॥

तेरे दिल ने दिल दीवाना किया, मुझे इस जग से बेगाना किया ।
मैंने क्या खोया क्या पाया हैं, यह मैं जानू या वो जाने ॥

मिलता भी है वो मिलता भी नहीं, नजरो से मेरी हटता भी नहीं ।
यह कैसा जादू चलाया है, यह मैं जानू या वो जाने ॥

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