महिला के प्रजनन तंत्र की संरचना Mahila ke parajanan tantar ki sanrachna

स्त्री के शरीर के जिन अंगों में गर्भधान एवं शिशु का विकास होता है उसे प्रजनन अंग कहा जाता है. इन अंगों को दो भागों में बांटा जा सकता है - बाहरी प्रजनन अंग और अंदरुनी प्रजनन अंग. आइये आज के इस पोस्ट के माध्यम से हम स्त्री के बाहरी प्रजनन अंगो और अंदरुनी प्रजनन अंगो की जानकारी प्राप्त करते है.

बाहरी प्रजनन अंगः   Read More Posts
  1. योनि द्वार: बाहरी प्रजनन अंग मे योनि द्वार प्रमुख होता है यह मूत्र द्वार एवं मल द्वार के बीच स्थित होता है और माहवारी आने का मार्ग होता है. स्त्री की योनि दो प्रकार के होठों से ढकी रहती है उन्हें "बडे भगोष्ठ" और "छोटे भगोष्ठ" के नाम से जाना जाता है. यह मूत्र द्वार, योनि द्वार एवं टिटनी ( क्लिटोरीस ) को ढके रहतें हैं तथा उन्हें सुरक्षित रखतें हैं. 
  2. टिटनी ( क्लिटोरीस)- यह मांस के एक छोटे दाने की तरह होता है, जो मूत्र द्वार के ठीक उपर की तरफ स्थित होता है जहॉ दोनों बडे भगोष्ठ मिलते हैं. यह उत्तेजना का मुख्य बिन्दु होता है और जब इसे छुआ जाता है तो स्त्री को सुख की अनुभूती होती है.
अंदरुनी प्रजनन अंगः
  1. योनिः गर्भाशय से शुरु होकर योनि के मुख तक जाने वाला मार्ग है, जिससे जन्म के समय बच्चा बाहर आता है. यहीं माहवारी का मार्ग है तथा वह् जगह है जहां संभोग के समय पुरुष का शिश्न प्रवेश करता है.
  2. गर्भाशय मुखः गर्भाशय मुख को गर्भाशय ग्रिवा भी कहते हैं. यह प्रायः बहुत छोटा छिद्र होता है और गर्भाशय को योनि मार्ग से जोडता है. शिशु जन्म के समय गर्भाशय मुख स्वतः हीं खुलकर चौडा हो जाता है, ताकि शिशु योनि मार्ग से होता हुआ बाहर आ जाए.  
  3. गर्भाशयः यह नाशपाती के आकार का मांसपेशियों का बना एक खोखला अंग है, जिसमें शिशु विकसित होता है. जब स्त्री का अंडाणु निषेचित होकर गर्भाशय में अंर्तस्थापित नहीं हो पाता तो गर्भाशय की अंदरुनी परत हर माह झड कर बाहर आती है जो रक्त के समान दिखाई देती है. इसे हीं माह्ववारी या मासिक धर्म कहते हैं.
  4. फैलोपियन ट्यूब्सः यह गर्भाशय के उपरी भाग से निकलने वाली दो नलिकाएं है जो अंडाशय से गर्भाशय को जोडती है. इससे हीं स्त्री के अंडाशय से अंडा निकलकर गर्भाशय तक पहुंचता है. यहीं वह जगह है जहां अंडे के साथ पुरुष का शुक्राणु मिलकर उसे निषेचित करता है.
  5. अंडाशयः यह पेट के निचले हिस्से, जिसे पेडु के नाम से भी जाना जाता है, मे स्थित दो अंडाकार अंग है. इस अंग को बीजदानी के नाम से भी जाना जाता है तथा इसमें जन्म से हीं 3 लाख से 5 लाख तक अंड कोशिकाएं होती है. यह स्त्री के यौन हार्मोनस इस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्ट्रोन को पैदा करती है. किशोरावस्था से प्रत्येक माह स्त्री के एक अंडकोश से केवल एक अंडा परिपक्व होकर बाहर निकलता है जो सुई के नोंक के बराबर होता है. यदि अंडा पुरुष के शुक्राणु से मिलकर निषेचित हो जाता तो महिला गर्भवती हो जाती अन्यथा नष्ट् होकर मासिक धर्म के दौरान बाहर निकल जाता है. 
  6. यौन झिल्ली ( हाईमन)- यह वह झिल्ली है जिससे योनि के भीतरी मुंह का कुछ हिस्सा बन्द रहता है. सामान्यतः यह् झिल्ली, प्रथम यौन संभोग के दौरान फट जाती है जिसके कारण इसे स्त्री के कौमार्य के साथ जोडा जाता है. हालॉकि यह झिल्ली विभिन्न तरह के शारीरिक क्रियांओं और दुर्घटनाओ के दौरान भी फट सकती है. कभी-कभी यह इतनी लचीली होती है कि संभोग के दौरान भी नहीं फटती और कुछ स्त्रीयों में तो यह जन्म से हीं मौजूद नहीं होती. अतः इसे स्त्रीयों के कौमार्य के साथ जोडा जाना एक सामाजिक भ्रांति है. 
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