देशों के नाम कैसे पड़े Desho ke naam kaise padhe

देशों के नाम कैसे पड़े Desho ke naam kaise padhe, How were the names of countries.
अक्सर जब हम किसी देश में घूमने या छुट्टियां मनाने जाते हैं, तो वहां की खूबसूरत जगहों को देखना पसंद करते हैं। उस देश के इतिहास के बारे में भी पढ़ना पसंद करते हैं।


हमने आज तक ये तो कई बार पढ़ा है कि किस देश की खोज किसने की, लेकिन इन देशों के नाम कैसे पड़े, ये बहुत कम लोग ही जानते होंगे। जैसे भारत का नाम प्राचीन काल में राजा दुष्यंत के पुत्र भरत के नाम से पड़ा। इसी प्रकार कुछ देशों के नामकरण के पीछे एक दिलचस्प कहानी छिपी हुई है। आइए जानते हैं: 

पाकिस्तान: पाकिस्तान का अर्थ है पवित्र भूमि। पाक मतलब- शुद्ध और स्तान यानी भूमि। पाकिस्तान 14 अगस्त, 1947 को भारत से अलग होकर स्थापित हुआ था। जबकि इसका नाम एक दशक पहले ही सुर्खियों में आ गया था। एक मुस्लिम राष्ट्रवादी नेता चौधरी रहमत अली ने ब्रिटिश सरकार से भारतीय उपमहाद्वीप में एक अलग मुस्लिम राज्य बनाने की वकालत की थी। उन्होंने 28 जनवरी, 1933 को अपने पैम्फलेट 'नाउ और नेवर' में बताया कि 3 करोड़ मुस्लिमों की इच्छा एक अलग स्वतंत्र राष्ट्र की है। यहां के निवासी पंजाब, बंगाल, अफगान प्रांत, सिंध और ब्लूचिस्तान से होंगे। इन सभी राज्यों का संयुक्त नाम-पाकिस्तान बना। पाकिस्तान का ही एक प्रांत 1971 में बांग्लादेश नाम से नया देश बना था।
कनाडा: स्थानीय भाषा में कनाडा का अर्थ है - नथिंग हेयर (यहां कोई नहीं है)। कनाडा के नाम को लेकर दो कहानियां प्रचलित हैं। पहली कहानी में फ्रांस के खोजकर्ता जैक्स कार्टियर एक बार सेंट लॉरेंस नदी से रवाना हो रहे थे, तो उनके साथी मार्गदर्शकों ने बताया कि यह रास्ता कनाटा की ओर जाता है। यह एक गांव है, जहां के आदिवासी खुद को कनाटा नहीं कहते थे, क्योंकि वहां कई बर्फीले जंगलों से लोग आकर बसे थे, इसलिए कनाटा को वो एक मिश्रित गांव के रूप में मानते थे। कार्टियर ने कनाटा को कनाडा सुना और तब से वह उसी नाम से जाना जाने लगा। दूसरी कहानी के अनुसार, स्पेन देश के निवासी अमेरिका के प्रसिद्ध धनी व्यक्तियों को ढू़ंढने निकले। जब उन्हें वहां कोई नहीं मिला तो उन्होंने उस स्थान को एका नाडा या का नाडा कहना शुरू किया, जिसका अर्थ था- यहां कोई नहीं है। जब कुछ सालों बाद फ्रांस देश के निवासी वहां जाने लगे तो स्पेन निवासियों ने एका नाडा चिल्लाना शुरू कर दिया। वो यह बताना चाह रहे थे कि वहां उनके मतलब का कुछ नहीं है। फ्रांस के निवासियों ने सोचा कि कनाडा उस देश का नाम है और तब से कनाडा नाम पड़ गया।
चीन: इस शब्द का अर्थ है - केंद्रीय देश। इसके इलावा चीन के दो और नाम कैथे और ह्वांगुओ भी हैं। दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश चीन को कई नाम से पुकारा जाता है। सबसे पहले इसका मूल नाम चीन शब्द यहां के पहले राजा चीन शी हुआंग्डी द्वारा स्थापित चीन राजवंश से लिया गया था। इसी तरह इसका दूसरा नाम कैथे मशहूर यात्री मार्को पोलो ने रखा था, जो उत्तरी चीन को इसी नाम से पुकारते थे (दक्षिणी चीन का नाम मैंगी था)। ह्वांगुओ चीन का तीसरा नाम है। यह हॉंग (सेंटर) और गुओ (देश) शब्दों से बना है। इसका मतलब हुआ एक केंद्रीय देश या मध्य साम्राज्य। यहां के लोग कई सालों तक इस तथ्य पर विश्वास करते थे कि चीन स्वर्ग के बिल्कुल बीच में स्थित है और पृथ्वी के केंद्र में है। इसे स्वर्गिक साम्राज्य भी कहा जाता था। यह माना जाता था कि लोग यहां से दूसरी ओर जाएंगे तो वहां की भूमि जटिल और असुविधाओं वाली हो जाएगी। कई हद तक उनका यह मानना ठीक ही था, क्योंकि उस समय चीन से बाहर कई प्रकार के कबीले रहते थे।
अर्जेंटीना: चांदी अर्जेंटीना का शाब्दिक अर्थ है। स्पेन के जुआन डियाज़ डे सोलिस ने पुर्तगाल में अपनी पत्नी की कथित रूप से हत्या कर दी। पुलिस से छिपते हुए वह अपने देश भाग गया और स्पेन की खोज के स्वर्ण युग के दौरान कई यात्राओं में शामिल रहा। 8 अक्टूबर, 1515 को डियाज़ डे सोलिस प्रशांत महासागर की पश्चिमी दिशा की ओर जगह पाने की उम्मीद में तीन जहाजों के कमान के साथ रवाना हुआ। रास्ते में उसे ब्यूनस आयर्स (अर्जेंटीना की राजधानी) जगह मिली, जहां उसे नरभक्षियों का शिकार होना पड़ा। डियाज़ की मौत के बाद उसके बहनोई फ्रांसिस्को डे टॉरेस ने जहाज की कमांड अपने हाथों में ली। रास्ते में एक जगह उसका जहाज खराब हो गया, लेकिन इस भूमि के लोग फ्रेंडली व्यवहार के थे। उन्होंने फ्रांसिस्को को चांदी से बने हुए गहने दिए। इस तरह इस जगह का नाम 'द लैंड ऑफ सिल्वर' यानी अर्जेंटीना रखा गया।
चिली: चिली शब्द की उत्पत्ति मापुचे शब्द चिली से हुई, जिसका मतलब है- जहां पृथ्वी का अंत होता है। इसके बारे में कहा जाता है कि जब मापुचे सभ्यता के लोग अर्जेंटीना से पश्चिम दिशा की ओर जाने लगे, तो उन्होंने पाया कि यह एक उपमहाद्वीप का तट है, जिसके पार प्रशांत महासागर फैला हुआ है, यानी यहां पर यह भूमि समाप्त हो रही है। इसलिए उन्होंने इसका नाम चिली दिया। दूसरी बात कही जाती है कि मापुचे सभ्यता के लोग पक्षियों की नकल करते हुए चीले-चीले आवाज करते थे, जिसकी वजह से इस देश का यह नाम पड़ा।
चेकोस्लोवाकिया: चेक और स्लोवाक दो अलग-अलग समुदाय हैं। इसे सबसे कठिन स्पेलिंग (Czechoslovakia) वाले नामों में शुमार किया जाता है। 30 वर्षों तक कम्युनिस्ट शासन में रहने के बाद चेकोस्लोवाक सोशलिस्ट रिपब्लिक का पतन हुआ और नए सत्ता परिवर्तन को 'वेलवेट रेवोल्यूशन' कहा गया। यह सोवियत यूनियन के पतन का समय था। यह सत्ता परिवर्तन बिना खून बहाए हुआ था। वहां के नया राजनीति नेतृत्व उभरा और यह एक नया गणतंत्र बना। अब राष्ट्र के नाम से सोशलिस्ट शब्द हटाया गया और नया नाम चेकोस्लोवाक रिपब्लिक दिया गया। फिर भी स्लोवाक नेताओं को यह आइडिया पसंद नहीं आया। उन्हें लगा कि इससे उनकी महत्ता कम हो जाएगी। उन्होंने इस देश के नए नाम में हाइफन मार्क (चेके-स्लोवाक रिपब्लिक) लगा दिया। अब इसे चेक पार्टी के नेताओं को अस्वीकार्य कर दिया। चेक और स्लोवाक समुदायों में नाम को लेकर काफी समय तक तनाव रहा। इसके बाद वहां की जनता से मतदान करा कर 1 जनवरी, 1993 को बिना किसी हिंसा के दो अलग-अलग राष्ट्रों को विभाजित कर दिया गया, जिन्हें चेक रिपब्लिक और स्लोवाकिया नाम से जाना जाता है।
स्पेन: लगभग 3000 साल पहले, फोनीशिया सभ्यता के पूर्वज जब एक भूमि की खोज में निकले, तो उन्हें भूमध्यसागर के पश्चिम की ओर एक भूमि मिली। वहां उन्हें चूहों की एक प्रजाति (हाइरेक्स) काफी संख्या में दिखाई पड़ी। इसलिए उन्होंने इसे आई-शापन-इम यानी आइलैंड ऑफ द हाइरेक्स नाम दिया। जब रोम के निवासी पूरे यूरोप पर शासन करने आए तो उन्होंने इसका नाम बदलकर हिस्पैनिया कर दिया। हालांकि, हिस्पैनिया में जिन चूहों की प्रजाति को देखा गया था, वो दरअसल खरगोश थे। इस प्रकार खोजकर्ताओं के गलत ऑब्ज़र्वेशन और नामकरण की वजह से देश का नाम स्पेन पड़ा।