अवसर पर हुई छोटी सी चुक Avasar par hui chhoti si chuk

अवसर पर हुई छोटी सी चुक Avasar par hui chhoti si chuk, The small lapse on the occasion.

अवसर पर हुई छोटी सी चुक हमें अपने लक्ष्य से बहुत दूर कर देती हैं. जिस प्रकार छोटी सी चुक ने राजेश को अपने लक्ष्य से बहुत दूर कर दिया. आइये इस कहानी के माध्यम से समझने की कोशिश करते है.


एक गांव में एक गरीब व्यक्ति रहता था जिसका नाम था राजेश वो बहुत कम ही पढ़ लिख पाया था। उसी गांव में एक प्राचीन और विशाल पुस्तकालय था। एक बार उस पुस्कालय में आग लग गई ,और कई लोग इकट्ठा हो गए जब आग बुजाई जा रही थी तब एक पुस्तक राजेश के हाथ लग गई वो उस पुस्तक को घर ले आया और उसको खोल कर पढने लगा।

पुस्तक तो कुछ खास नहीं थी लेकिन उसमे एक पर्ची थी जिसमे लिखा था कि उसके ''गांव से कई दूर एक समुद्र के किनारे पड़े पत्थरो- कंकरो के बीच एक बेशकीमती हीरा पड़ा है, और उसकी पहचान यह है कि वो अन्य पत्थरो से ज्यादा उष्ण और कई ज्यादा मुलायम हैं।'' 

राजेश ने हिरा पाने कि ठान ली और हीरे को पाना अपना लक्ष्य बना लिया। उसने अपना सब कुछ बेच कर अपने लक्ष्य के लिए धन जुटाया और उस समुद्र कि तरफ निकल पड़ा। उसके अंतर्मन में केवल उसका लक्ष्य था, उसे लक्ष्य के शिवा कुछ भी नजर नहीं आता था। जैसे - तैसे राजेश समुद्र के किनारे पंहुचा और वहाँ जाकर वो देखता हैं कि समुद्र के किनारे तो बहुत कंकर -पत्थर पड़े हैं, और इनमे से हिरा ढूँढना बहुत कठिन हैं।  लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और एक योजना बनाई कि एक-एक पत्थर को हाथ में लेकर समुद्र में फेकुंगा, जिससे कोई पत्थर नहीं छूटेगा।

योजना के अनुसार उसने अपना कार्य प्रारम्भ किया और एक - एक पत्थर को उठा कर समुद्र में फेंकने लगा। इस तरह रोजाना सुबह से शाम तक वो समुद्र में पत्थर फेंकता रहता था, कई दिनों तक ऐसा करने से उसकी आदत हो गई कि पत्थरो को वो हाथ मैं लेता और जल्दी से फेंक देता था।

इसी तरह एक  दिन उसके हाथ मैं हिरा आया लेकिन वो कुछ समज पाता तब तक अपनी आदत के चलते उसको भी समुद्र मैं फेक दिया। फिर उसको बहुत पछतावा हुआ। 

इस प्रकार छोटी सी चुक ने राजेश को अपने लक्ष्य से बहुत दूर कर दिया।

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