प्रधानमंत्री जन-धन योजना Pradhanmantri Jan dhan yojana

प्रधानमंत्री जन-धन योजना.
Pradhanmantri Jan dhan yojana.
Prime Minister Jan-dhan plan.
प्रधानमंत्री जन-धन योजना प्रत्येक नागरिक को देश की अर्थव्यवस्था से जोडऩे का प्रयास : नरेन्द्र मोदी

नई दिल्ली। 68 वें स्वतंत्रता दिवस पर देश की जनता को लाल किले से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी गरीबों के लिए बैंक खाते खोलने और एक लाख तक के बीमा की योजना लागू करने की बात कही थी। अपनी घोषणा को क्रियांवयित करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री जन-धन योजना का शुभारंभ कर दिया। जिसके तहत पहले ही दिन पूरे देशभर से करीब डेढ़ करोड़ नए बैंक खाता बने।

इस मौके पर देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को देश की अर्थव्यवस्था से जोडऩा है। इस माध्यम से गरीबी उन्मूलन में भी मदद मिलेगी। जब हम मिलकर लडेंगे तो गरीबी से मुक्ति मिल जाएगी। सरकार और सरकारी संपत्ति गरीबो के लिए हैं।

उन्होंने कहा कि देश की 40 फीसदी आबादी वित्तीय छुआछूत का शिकार है। इस योजना के माध्यम से इस छुआछूत को खत्म करना है। आजादी के समय की बात करते हुए उन्होंने कहा कि 68 वर्ष पहले देश में बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था, लेकिन आज भी 68 फीसदी आबादी वित्तीय सेवाओं से वंचित है। वह लोग आजतक अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा से जुड़ नहीं पाए है।

इसके साथ ही उन्होंने जिक्र किया कि देश का अमीर आदमी जिस दर पर ऋण लेता है गरीब आदमी उससे पांच गुना दर पर ऋण लेता है। कभी कभी गरीब ऋण के चलते साहूकारों के चुंगल में ऐसा फंस जाता है कि आत्महत्या तक करनी पड़ जाती है। अमीर ऋण चुकाने में आनाकानी करता है, लेकिन गरीब समय से पहले ऋण चुकाता है। अगर किसी महिला ने ऋण लिया है तो अवश्य ही वह समय से पहले ऋण चुकाती है। अगर गरीबों का बैंक में खाता होगा तो उससे उसमें बचत करने की प्रवृत्ति विकसित होगी। जिसका लाभ देश की अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने इस योजना को भ्रष्टाचार रोकने में सहायक बताते हुए कहा कि गरीबों को मिलने वाली मदद सीधे उनके खाते में पहुंचेगी। बिचौलियों की भूमिका अपने आप खत्म हो जाएगी।

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस योजना को सफल बनाने के लिए उनके द्वारा देशभर के करीब सात लाख बैंक कर्मियों को व्यक्तिगत रूप से ईमेल भेजा गया है। जिसका परिणाम है कि पहले ही दिन करीब डेढ़ करोड़ खाते खुल गए हैं। इतने बड़े पैमाने पर डेबिट कार्ड और दुर्घटना बीमा मिलना भी अपने आप में एक रिकार्ड है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में वीजा और मास्टरकार्ड की मान्यता है। क्या हम डेबिट कार्ड को यह मान्यता नहीं दिला सकते। जब एक साथ डेढ़ करोड़ डेबिट कार्ड होंगे तो इसे स्वत: मान्यता मिल जाएगी। हमारी संस्कृति के्रडिट कार्ड पर जीवनयापन वाली नहीं है, हमारी परंपरा बचत करने वाली है।

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