जिंदगी का असली मजा Jindgi ka asli majaa

Jindgi ka asli majaa. जिंदगी का असली मजा। The real enjoy of life.

एक बार कि बात है। एक आदमी था। वह पूरा दिन पैसे कि दौड़ धुप में रहता था। किसी भी पडोसी से उसकी बनती नहीं थी।

हर दिन किसी न किसी से झगड़ा करना उसकी आदत बन गई थी। वह एक एक साधू के पास गया। साधू ने उससे उसकी इच्छा पूछी।

उसने बताया कि उसे दुनिया में सबसे अमीर बनना है वो क्या करें। साधू भी उसके बारे में पहले से ही जानता था। साधू ने उससे कहा :- बेटा अब पैसा कमाकर क्या करोगे। तुम्हारी मृत्यु नजदीक आ चुकी है। तुम केवल 9 दिन ही जिन्दा रहोगे इसलिए ये दिन अपने परिवार और आस - पड़ोस के लोगो के साथ प्यार-पूर्वक गुजार लो और हो सके तो कुछ अच्छे काम करो ताकि तुम्हारे मरने के बाद भी लोग तुम्हे याद करें।


ये सुनकर उस आदमी को अपने बीते दिनों में हुई घटनाओ पर संकोच होने लगा। इस तरह दो दिन बीत गए। उसने सोचा कि अब मरने से पहले कुछ अच्छे काम करू। वो उन सब के पास गया जिनसे उसका झगड़ा हुआ था और अपनी गलती मानकर माफ़ी मांगी। ये सब देखकर लोग हैरान थे कि आखिर इसे ऐसा क्या हो गया जिससे ये बुरा इंसान इतना बदल गया है। इस तरह 7 दिन बीत गए। आठवें दिन वो साधू उसके घर आया।

उस आदमी ने साधू ने उससे पूछा :- बेटा दिन कैसे कट रहे है।
उस आदमी ने जवाब दिया :- महाराज दिन तो बहुत अच्छे कट रहे है पर अब क्या फायदा अब तो मरने का समय नजदीक आ गया है। काश मेरी उमर लम्बी होती। 
साधू ने उससे कहा :- बेटा जिंदगी का किसी को पता नहीं होता कौन कितना जियेगा या कब मौत आएगी। मुझे अपने बारे में भी पता नहीं तो मैं तुम्हारी मृत्यु के बारे में क्या बता सकता हूँ, वो तो मैंने तुम को सुधारने के लिए कहा था। मैं तुम्हें ये दिखाना चाहता था कि पैसा ही जिंदगी में सब कुछ नहीं होता।

यह सुनकर वो आदमी खुश हुआ और उसने साधू का धन्यवाद किया। यह कहकर साधू वहां से चला गया।

फिर पूरी उम्र उस आदमी ने सबसे प्रेमपूर्वक व्यवहार रखा।

MHB2013

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